बाढ़ के निशान के पास पहुंचा गंगा का जलस्तर, खेतों समेत गांव में भरा पानी
जंगल जलमग्न होने से चारे की परेशानी खड़ी हुई, आज ओर हो सकती है भारी बढ़ोतरी

हापुड़। पहाड़ों समेत मैदानों में बारिश होने से गंगा में एक बार फिर उफान आने से खादर के गांवों तक गंगा का पानी पहुंच गया है। किसानों को पशुओं के लिए चारा लाने में भी दिक्कत होने लगी है। वहीं बिजनौर बैराज से पानी छोड़ने के बाद खतरा और बढ़ गया है, सोमवार को तहसीलदार ने गंगा तटीय गांवों का निरीक्षण किया।
उत्तराखंड के पहाड़ों और पश्चिमी उप्र में बारिश होने से गंगा में दोबारा उफान शुरू हो गया है। गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू होने से खादर क्षेत्र के ग्रामीणों में बेचैनी बढ़ने लगी है। गंगा के उफान के साथ ही बारिश का पानी भरने से निचले जंगल में खड़ीं फसलों में काफी बर्बादी हो रही है। जिससे किसानों को अपने पशुओं के लिए चारे की किल्लत झेलनी पड़ रही है। किसान राजेंद्र, सोनू, बलवीर सिंह, दिनेश सिंह का कहना है कि गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने से निचले जंगल में गाढ़ी कमाई और कड़ी मेहनत मशक्कत से उगाई हुईं फसलों में फिर से बर्बादी होने के साथ ही फसलों पर संकट मंडराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के सूत्रों का कहना है कि पहाड़ों के साथ ही मैदानों में बारिश होने से गंगा के जलस्तर में फिर से बढ़ोतरी हो रही है, जिसके चलते सोमवार की सुबह से लेकर देर शाम तक जलस्तर में करीब 10 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है, जिससे ब्रजघाट गंगा का जलस्तर बढ़कर समुद्र तल से 198.68 मीटर के निशान पर पहुंच गया है।
रास्तों पर पहुंचने लगा पानी
गढ़ खादर क्षेत्र के गांव कुदैनी की मढ़ैया और शाकरपुर में रास्तों पर पानी पहुंचना शुरू हो गया है। जिससे किसानों को पशुओं के लिए चारा लाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा ग्रामीणों का खेत समेत घेर में रखे इंधन भी जलमग्न हो गए हैं।
तहसीलदार ने गंगा तटीय गांवों में पहुंच हाल जाना
सोमवार की शाम तहसीलदार पवन कुमार ने कुदैनी की मढै़या, शाकरपुर, मुकीमपुर, भगवंतपुर गांवों में पहुंचकर बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया और ग्रामीणों से वार्ता की। उन्होंने ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन भी दिया। तहसीलदार का कहना है कि पहाड़ों और मैदानों की बारिश से गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होना सामान्य बात है, लेकिन फिलहाल बाढ़ आने जैसी कोई भी संभावना नहीं है, हालांकि पहाड़ों समेत मैदानों में बारिश होने के मद्देनजर बाढ़ चौकियों को सतर्क रहने के साथ ही लेखपालों को जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी की स्थिति पर नजर रखने का जिम्मा सौंपा हुआ है। जो तहसील मुख्यालय में रिपोर्ट दे रहे हैं।







