BlogHelthउत्तर प्रदेशएक्सक्लूसिव खबरेंदिल्ली एनसीआरप्रशासनहापुड़

पर्चा होने पर भी नाबालिगों को नहीं दी जाएंगी नशीली दवा: हेमेंद्र चौधरी

घर में अन्य परिजन ना होने पर अभिभावकों को कॉल कर लेंगे सहमति

By:Robin Sharma

हापुड़। नाबालिगों में बढ़ रही नशे की लत पर अंकुश लगाने के लिए ड्रग विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। दवा कारोबारियों को दवा का पर्चा लेकर पहुंचने वाले नाबालिगों को भी नारकोटिक्स से संबंधित दवाएं नहीं देने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। संदिग्ध स्थिति से निपटने के लिए दुकान में सीसीटीवी लगाने को कहा गया है। अगर विक्रेता निर्देश का उल्लंघन करते मिले तो नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है। युवाओं में नशे की लत दूर करने के लिए सरकार की ओर से नशा मुक्ति अभियान चलाए जा रहे हैं। शोध के अनुसार नाबालिग उम्र में ही बच्चे नशे की चपेट में आ जाते हैं। लिहाजा, इसे बाद में काबू करना बेहद कठिन हो जाता है। तमाम शोध से प्राप्त सुझाव और मनोवैज्ञानिकों से विचार विमर्श के बाद केंद्र सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी हुई है। इसके तहत पांच से ज्यादा और 18 साल से कम उम्र के बच्चों या किशोर को मरीजों के लिए चिकित्सक द्वारा लिखी गई नारकोटिक्स कैटगरी की दवा बेचने पर अंकुश लगा दिया है। पर्चा होने पर भी दवा विक्रेता दवा नहीं दे सकेंगे। शनिवार को नए नियमों की जानकारी देते हुए ड्रग इंस्पेक्टर हेमेंद्र चौधरी ने केमिस्टो को नए नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से जारी निर्देश के तहत तनाव मुक्त की दवा एल्प्राजोलाम, नींद की दवा डाइजीपाम, दर्द निवारक के तौर पर इस्तेमाल की जाने वाले मॉर्फिन इंजेक्शन, पैथाडीन इंजेक्शन, ब्यूपी नार्फिन इंजेक्शन और ट्रामाडाल कैप्सूल समेत आदि दवाएं नाबालिग को नहीं बेची जा सकेंगी। भले ही इन दवाओं को इलाज के लिए मरीज को चिकित्सक ने पर्चा पर लिखकर दिया हो। हेमेंद्र चौधरी ने कहा है, कि अगर किसी परिवार से नाबालिग दवा लेने आता है और मना करने पर वह परिवार में अन्य किसी बड़े व्यक्ति के होने से मना करता है तो दवा देनी है कि नहीं, विषम परिस्थिति से निपटने के लिए ड्रग इंस्पेक्टर ने नाबालिग से अभिभावक का नंबर लेकर कॉल कर नाबालिग का सत्यापन करने के बाद दवा विक्रय करने को कहा है। उन्होंने बताया कि नशीली दवा का सेवन करने वालों को बाहर से पकड़ना कठिन होता है। बहुत कम पता चलता है, कि युवक ने नशा किया हुआ है या नहीं, इसलिए नाबालिग दवा के लती बन जाते हैं।

निगरानी के लिए लगाए जाएंगे सीसीटीवी

ड्रग इंस्पेक्टर हेमेंद्र चौधरी ने जिले भर के सभी मेडिकल स्टोरों में सीसीटीवी लगाने और रिकॉर्डिंग 30 दिन तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आशंका जताई है कि निर्देश के बावजूद कई दवा के थोक और रिटेल कारोबारी नाबालिग को दवा बेच सकते हैं। ऐसे में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य है। ताकि औचक निरीक्षण में करीब तीस दिन की रिकॉर्डिंग की जांच की जा सके।

Related Articles

Back to top button