कब है गोपाष्टमी, इस दिन क्यों करें गायों की पूजा? जानें मंत्र-मुहूर्त और आरती

हापुड़। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन गाय और उनके बछड़ों की पूजा करने की परंपरा है। वैसे तो ये पर्व पूरे देश में मनाते हैं लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा, वृंदावन आदि क्षेत्रों में इसकी रौनक सबसे ज्यादा होती है। इस पर्व से जुड़ी कईं मान्यताएं और परंपराएं भी हैं जो इसे और भी खास बनाती हैं।गोपाष्टमी कब है?
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 29 अक्टूबर, बुधवार की सबह 09 बजकर 23 मिनिट से शुरू होगी जो 30 अक्टूबर, गुरुवार को सुबह 10 बजकर 06 मिनिट तक रहेगी। चूंकि 29 अक्टूबर, बुधवार को अष्टमी तिथि पूरे दिन रहेगी, इसलिए गोपाष्टमी का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। इस दिन कई शुभ योग भी बनेंगे, जिससे चलते ये पर्व और भी अधिक शुभ फल देने वाला रहेगा।
गोपाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
सुबह 07:58 से 09:22 तक
सुबह 10:46 से दोपहर 12:10 तक
दोपहर 02:58 से शाम 04:22 तक
शाम 04:22 से 05:46 तक
ऐसे करें गोपाष्टमी की पूजा
-29 अक्टूबर, बुधवार की सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद हाथ में जल-चावल और फूल लेकर व्रत-पूजा का संकल्प लें। शुभ मुहूर्त में दूध देने वाली गाय और बछडे़ की पूजा करें।
-गाय और बछड़े को चंदन से तिलक लगाएं, फूलों की माला पहनाएं। एक बर्तन में पानी लेकर इसमें थोड़े से चावल, सफेद तिल और फूल मिलाकर गाए के पैरों पर डालें और ये मंत्र बोलें-
क्षीरोदार्णवसम्भूते सुरासुरनमस्कृते।
सर्वदेवमये मातर्गृहाणार्घ्य नमो नम:॥
-इसके बाद गाय को तरह-तरह की चीजें और पकवान आदि खिलाएं। गौ माता के पैर छूकर घर की सुख-समृद्धि और शांति के लिए प्रार्थना करें।







