किसानों के लिए अब बारिश बन रही बड़ी आफत
■खेतों में पानी भरने से फसलों में हो रहा नुकसान ■बाजारों की रंगत उड़ी, ग्राहक हुए नदारद
हापुड़। झमाझम बारिश से आम जन जीवन पटरी से उतरने के साथ ही बाजारों से लेकर सडक़ों की रंगत उड़ गई। वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित होने के साथ ही ग्राहक न आने से व्यापारी ठाली बैठने को मजबूर हुए। दो दिनों के बाद बुधवार की सुबह करीब ग्यारह बजे प्रारंभ हुआ झमाझम बारिश का क्रम रात में आठे बजे तक भी निरंतर जारी चलता रहा। जिससे आम जनजीवन पटरी से उतरने के साथ ही सडक़ों से लेकर बाजारों की रंगत भी पूरी तरह गायब हो गई। सडक़ों पर वाहनों के साथ ही राहगीरों की आवाजाही बेहद कम रही। ग्राहक न आने से व्यापारी भी हाथ पर हाथ रखकर ठाली बैठने को मजबूर रहे। सिबंतर माह में हो रही झमाझम बारिश राहत के बाद अब किसानों के लिए सबसे बड़ी आफत बनती जा रही है, क्योंकि खेतों में पानी भरने से फसलों में बर्बादी के साथ ही हरे चारे की खेती पूरी तरह चौपट होने से पशुओं के चारे का संकट गहराता जा रहा है। हालांकि दूसरी तरफ झमाझम बारिश होने से मौसम का मिजाज पूरी तरह सुहावना हो उठा है, जिससे उमस भरी गर्मी के साथ ही फिलहाल सूरज की तपिश भरी धूप से भारी राहत मिल रही है।
क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी
मौसम विज्ञानी डॉ.नफीस चौधरी का कहना है कि मानसून के आखिरी दौर में पहुंंचने पर इस तरह कई कई दिनों तक बारिश का सिलसिला चलना संभव रहता है। क्योंकि गंगा समेत नदियों में जो बाढ़ आती हैं उनमें सर्वाधिक मामले सिंतबर माह से जुड़े होते हैं। उन्होंने बताया कि अगले एक सप्ताह तक भी इसी तरह बारिश होने की संभावना बनी हुई है।







