गंगा का रौद्र रूप: हजारों हेक्टेयर जंगल को गिरफ्त में लेने के बाद गांवों की आबादी में भी घुस रहा पानी
खतरे के निशान से ऊपर होने पर भी लगातार गंगा के जल स्तर में हो रही बढ़ोतरी। खादर क्षेत्र के दो दर्जन गांव चपेट में फंसे, जनजीवन हु्आ ठप। पशुओं के चारे का संकट गहराया, कई मील दूर से लाना पड़ रहा चारा

गढ़मुक्तेश्वर/हापुड़। पहाड़ों पर झमाझम बारिश के साथ ही बादल फटने का सिलसिला जारी रहने से बाढ़ के निशान को लांघने के बाद भी गंगा मैया का रौद्र रूप थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे गढ़ खादर क्षेत्र में बसे दो दर्जन से भी अधिक गांवों में रहने वाले हजारों परिवारों को अपनी जानमाल को गंभीर खतरा नजर आने लगा है। हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि और उसमें खड़ीं फसलों को चपेट में लेने के बाद गंगा का पानी गड़ावली, मंढैया किशन सिंह, चक लठीरा, नयाबांस, आरकपुर, बख्तावरपुर समेत कई गांवों की आबादी में भी घुसता जा रहा है। संपर्क रास्तों पर भी कई फिट पानी बहने से खादर क्षेत्र का आम जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त होकर पटरी से उतर गया है। ग्रामीणों को रोजमर्रा से जुड़ीं जरूरी चीज भी मुहैया नहीं हो पा रही हैं। कई स्कूलों में पानी भरने से बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी ठप हो गई है। एहतियात के तौर पर बिजली सप्लाई काटे जाने से खादर क्षेत्र में ब्लैक आउट की स्थिति बनने से मोबाइल तक रिचार्ज नहीं हो पा रहे हैं।
अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की दे रहे सलाह
समुद्र तल से 199.33 मीटर पर जलस्तर पहुंचते ही खादर क्षेत्र में बाढ़ आने का बिगुल बज जाता है। शुक्रवार की देर शाम को गढ़ ब्रजघाट गंगा का जलस्तर बाढ़ वाले निशान को लांघने के बाद 199.46 मीटर पर पहुंच चुका है। परंतु इसके बाद भी बढ़ोतरी का क्रम जारी रहने से रात को बाढ़ की स्थिति और भी गंभीर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। एडीएम संदीप कुमार, एसडीएम श्रीराम यादव, सीओ वरुण मिश्र, तहसीलदार राहुल सिंह, चौकी प्रभारी इंद्रकांत यादव समेत जनपद के कई आला अधिकारी राजस्व टीम को साथ लेकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सघन दौरा करने में जुटे हुए हैं। जो ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के साथ ही जलभराव वाले स्थानों पर न आने जाने की नसीहत भी दे रहे हैं। एसडीएम श्रीराम यादव ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था भी कराई जा रही है।







